कोवीशील्ड के दूसरे डोज को लेकर इतनी दूविधा क्यों ????

जब से  भारत में कोरोना की वैक्सीन लगना शुरू हुई है तब से वैक्सीन के दोनों डोज़ में अंतर को लेकर लोग असमंजस में है |  क्योकि केंद्र सरकार ने दो बार नियम बदल दिए है पहले 4 -6 हफ्ते से बढाकर 6-8 हफ्ते किया फिर दूसरी बार में यह अंतर 12 -16 हफ्ते कर दिया है |

इस फैसले के पीछे सरकार की दलील क्या है?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) का कहना है कि दो डोज के अंतर को केवल कोवीशील्ड के लिए बढ़ाया है, कोवैक्सिन के लिए नहीं। यह फैसला वैक्सीन का एक डोज कितना इफेक्टिव है इस आधार पर तय किया गया। कोवीशील्ड के पहले डोज की इफेक्टिवनेस ज्यादा है। १२ हफ्ते तक लाभप्रद है कोवीशील्ड का पहला डोज़ जो की ट्रायल से पता किया गया है| यही वजह है कोवीशील्ड के दूसरे डोज़ में ज्यादा अंतर है | और कोवैक्सिन की ट्रायल नहीं की गई यही वजह है की उसके दूसरे डोज़ का अंतर नहीं बढ़ाया गया |

दूसरा डोज़ की क्या जरुरत जब पहला डोज़ ही है असरदार ??

साइंटिस्ट का कहना है की इन वैक्सीन को खास तरीके से डिज़ाइन किया गया है और ट्रायल्स में दो डोज़ की ज्यादा समय तक एफ्फेक्टिवनेस  सामने आई है | जॉनसन एंड जॉनसन और स्पुतनिक लाइट वैक्सीन के एक डोज शरीर के लिए पर्याप्त है।

वैक्सीन का पहला डोज़ शरीर में एंटीबॉडी को जगाता है जिस से की शरीर वायरस को पहचाने और शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय  करें | और दूसरा डोज़ एंटीबॉडीको बढ़ा देता है और इम्यून सिस्टम को और मजबूत करता है | 

जानिए कोवीशील्ड के दो डोज में इतना अंतर क्यों ?

कई रिसर्च के बाद ये बात सामने आई है की पहले डोज़ के कुछ हफ्तों बाद दूसरा डोज़  लगवाया जाए तो वैक्सीन का असर ज्यादा प्रभावशाली हो जाता है |

शुरुआत में कहा गया कोवीशील्ड के पहले और दूसरे डोज़ में ४-६ हफ्तों का अंतर बाद में उसे 6-8  किया गया |  हालांकि, रिसर्च में पाया गया की 8 हफ्ते से अधिक से दो डोज़  लगवाया जाए तो उसकी इफेक्टिवनेस 80%-90% हो जाती है।

एक स्टडी के अनुसार वैक्सीन की प्रभाव और शरीर का इम्यून रेस्पॉन्स भी दोनों डोज की देरी से एफेक्ट होता है। वैज्ञानिकों द्वारा पता चला कि कोवीशील्ड लगने के बाद दो डोज़ में अंतर जितना ज्यादा हो उसका प्रभाव उतना अधिक होगा | 6 हफ्ते से कम अंतर से दो डोज दिए गए तो इफेक्टिवनेस 50-60% रहेगी , लेकिन अगर अंतर 12-16 हफ्ते का हो तो  इफेक्टिवनेस 81.3% होगी ।

जानिए भारत के साथ और देशो में भी इसका अंतर बढ़ाया गया है?

  • नहीं। भारत से पहले ब्रिटेन और स्पेन में भी अंतर बढ़ाया गया है |
  • डॉक्टरों का भी कहना है कि अगर दो डोज के बीच का अंतर को ज्यादा किया जाए तो वायरस के खिलाफ iG एंटीबॉडी रेस्पॉन्स डबल हो सकता है।

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